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इन दो चार महिलाओं ने श्रीराम की आरती उतारकर जैसे ही ये सन्देश देना चाहा कि सचमुच में एक दो मुस्लिम है जो कट्टर नहीं है...

इन दो चार महिलाओं ने श्रीराम की आरती उतारकर जैसे ही ये सन्देश देना चाहा कि सचमुच में एक दो मुस्लिम है जो कट्टर नहीं है... तभी वो सारे मुस्लिम जो tv पर रोज आकर भाजपा को गंगा जमुनी तहजीब का पाठ पढ़ाते थे.. वो औकात में आ गए.. असली रूप में आ गए और कह दिया कि अल्लाह को छोड़कर इन महिलाओं ने दूसरे भगवान की पूजा कर दी इसलिए ये लोग आज से मुसलमान नहीं रहे..

इन महिलाओं की आड़ में मुस्लिम समाज खुद को अच्छा साबित करने की नौटंकी कर सकते थे.. जैसे अब्दुल कलाम और हमीद जैसों की आड़ में करते हैं.. पर जल्दबाजी में मौका चूक गए और अपने असली जिहादी रूप का दर्शन करा गए...

वैसे मैने ये गौर किया है कि इस्लाम मे सिर्फ महिलाएं ही हैं जो हिन्दू धर्म को आदर देती है.. और वो भी गिनी चुनी... ये वो माताएं बहनें हैं जिनके अंदर अपने घटिया समाज से लड़ने की थोड़ी बहुत हिम्मत होती है।

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विश्व के प्राचीनतम साहित्य संहिता और अरण्य ग्रंथों में इंद्र के वज्र और धनुष-बाण का उल्लेख मिलता है। भारत में धनुष-बाण का सबसे ज्यादा महत्व था इसीलिए विद्या के संबंध में एक उपवेद धनुर्वेद है। शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। पिनाक (Pinaka) : यह सबसे शक्तिशाली धनुष था। संपूर्ण धर्म, योग और विद्याओं की शुरुआत भगवान शंकर से होती है और उसका अंत भी उन्हीं पर होता है। भगवान शंकर ने इस धनुष से त्रिपुरासुर को मारा था। त्रिपुरासुर अर्थात तीन महाशक्तिशाली और ब्रह्मा से अमरता का वरदान प्राप्त असुर। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवराज इन्द्र को सौंप दिया गया था। उल्लेखनीय है कि राजा दक्ष के यज्ञ में यज्ञ का भाग शिव को नहीं देने के कारण भगवान शंकर बहुत क्रोधित हो गए थे और उन्होंने सभी देवताओं को अपने पिनाक धनुष से नष्ट करने की ठानी। एक टंकार से धरती का वातावरण...

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