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इन दो चार महिलाओं ने श्रीराम की आरती उतारकर जैसे ही ये सन्देश देना चाहा कि सचमुच में एक दो मुस्लिम है जो कट्टर नहीं है...

इन दो चार महिलाओं ने श्रीराम की आरती उतारकर जैसे ही ये सन्देश देना चाहा कि सचमुच में एक दो मुस्लिम है जो कट्टर नहीं है... तभी वो सारे मुस्लिम जो tv पर रोज आकर भाजपा को गंगा जमुनी तहजीब का पाठ पढ़ाते थे.. वो औकात में आ गए.. असली रूप में आ गए और कह दिया कि अल्लाह को छोड़कर इन महिलाओं ने दूसरे भगवान की पूजा कर दी इसलिए ये लोग आज से मुसलमान नहीं रहे..

इन महिलाओं की आड़ में मुस्लिम समाज खुद को अच्छा साबित करने की नौटंकी कर सकते थे.. जैसे अब्दुल कलाम और हमीद जैसों की आड़ में करते हैं.. पर जल्दबाजी में मौका चूक गए और अपने असली जिहादी रूप का दर्शन करा गए...

वैसे मैने ये गौर किया है कि इस्लाम मे सिर्फ महिलाएं ही हैं जो हिन्दू धर्म को आदर देती है.. और वो भी गिनी चुनी... ये वो माताएं बहनें हैं जिनके अंदर अपने घटिया समाज से लड़ने की थोड़ी बहुत हिम्मत होती है।

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